Black tea benefits and side effects

चाय पीने से नुकसान या फायदा  

चाय की आदत अमृत है या ज़हर!

 “I must drink lots of tea or I cannot work. Tea unleashes the potential which slumbers in the depth of my soul.”  – Leo Tolstoy

क्या आप जानते है कि पेय पदार्थों में पृथ्वी पर सबसे ज्यादा पानी का उपभोग होता है। ये हैरान करने वाली बात है कि चाय ,पेय पदार्थों के  उपभोग के मामले में दूसरे स्थान पर आता है। 

चाय पूरे विश्व में पसंदीदा पेय पदार्थ के रूप में छाया हुआ है। दुनिया में सबसे ज्यादा चाय का खपत भारत में है। लेकिन पर व्यक्ति का आकड़ा देखा जाये तो विश्व में तुर्की देश का नाम शीर्ष पर है।  

जिंदगी के भाग दौड़ में अक्सर हम चाय की चुस्कियों के आदी हो जाते है। चाहे वो घर में सुबह की चाय हो , दफ्तर में उलझे काम को लेकर या मित्रों के साथ बैठ नुक्कड़ वाली चाय , पुरे दिन में कम से कम 3 से 4 प्याली तो हो ही जाती हैं।

वैसे तो हम दिन की शुरुवात ही चाय के साथ करते है। उसके बाद भी हम कई बार अन्य अवसरों पर भी चाय पी लेते हैं। चाय का सेवन हम प्रत्येक दिन खुराक के रूप में करते लगते है। हमारी कई आदते ऐसे है जिनके बारे में हम कभी सोचते नहीं या कई बार हमें सोचने का मौका नहीं मिल पाता। किन्तु  आवश्यकता से अत्यधिक सेवन  करना जानलेवा हो जाता है।  

जैसे चाय पीने से हमें सुकून का एहसास होता हैं  और इसके साथ हमारे कई भावनात्मक लगाव जुड़े  रहते हैं। कई बार सगे सम्बन्धियों के यहाँ से एक आवाज़ आती है कि चाय बन रही ,पी के जाइए। 

असल में हमें इन आदतों से कई बार बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है और हम गौर नहीं कर पाते है। 

कही ना कही हम अपने इन छोटी-छोटी आदतों के कारण अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत बुरे परिणामों को झेलना पड़ता है।जिसका हमारे जीवन पर  आर्थिक  एवं शारीरिक रूप से होने वाले असुविधाओं का सामना करना पड़ता हैं।

चाय के आदी होने से हम तुरंत बीमार तो नहीं पड़ते लेकिन इसका अत्यधिक सेवन धीरे धीरे हमारे शरीर को कई तरह के बीमारियों से ग्रसित कर देता हैं।अल्सर , गैस की समस्या या भूख नहीं लगना आदि ऐसे कई बीमारिया हमारे सरीर में घर करने लगती हैं।

 ये छोटी छोटी बीमारियां जड़ की तरह होती है जो अन्य कई बड़ी बीमारियों जैसे कैंसर ,के पनपने का कारण बन जाती हैं। हम समझ भी नहीं पाते कि किन कारणों  से हम अनजानी मुशीबतो का सामना कर रहे है।  

हम चाय ज्यादा क्यों पीते हैं ? ()

हमारे चाय पीने के कई कारण होते है। कुछ तो बहुत सामान्य है लेकिन कुछ ऐसे कारण है जो  तर्क़संगत  नहीं  होते है। 

आदत नहीं कुछ, लाइलाज बीमारी है..

चाय से मेरी कुछ इस कदर की यारी है। 

चाय पीने के कुछ कारण ( )

चाय एक औषधि हैं,चाय का हमारे स्वाथ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। चाय पीने के कई फ़ायदे है। 
कई अध्ययन में पाया गया है कि बहुत से बीमारियों के साथ ही साथ कैंसर जैसे बीमारी से भी बचाने में सहायक होता है। यदि इसका सेवन उचित मात्रा से अधिक किया जाए तब ये अन्य बीमारियों का कारण भी बन जाती हैं। 

1 – औषधीय उद्देश्य के लिए ()

अगर देखा जाये तो चाय का सेवन औषधि के रूप में ही है। हम ठंडियों के मौसम में ,खासी या सर्दी ,गले में खराश आदि में चाय पीने से राहत महसूस करते है। 

2 – तरोताजा महसूस करने के लिए ()

कई बार हम अपने काम में इतने व्यस्त हो जाते है की हम सिरदर्द या नींद जैसा महसूस करने लगते है ,ऊर्जा की कमी महसूस करते है। उस समय हम चाय की सहायता लेते है जो हमें तुरंत सक्रिय कर देता है। हम आराम महसूस करते हैं। 

3 – दुसरो को अनुसरण करके()

मित्रो के साथ , कार्यस्थल में या रिस्तेदारो के घर चाय मिलने पर हम मना ना कर , चाय पी लेते हैं। 

4 – चाय पीने के आदी हो जाना ()

बहुत से लोगो चाय पिने के इतने आदी हो जाते हैं कि उसके बिना वो कमजोर महसूस करने लगते है। एक प्रकार का नशा हो जाता है। 

5 – चाय का बढ़िया स्वाद()

देखा जाये तो चाय का स्वाद लेना हम सभी को पसंद है। चाय का नाम सुनते ही दिमाग में एक ही बात आती है कि एक कप चाय हो जाये। 

6 – चाय के साथ भावनात्मक लगाव ()

बारीश का मौसम हो तो लोगो का चाय के साथ एक अलग ही लगाव दिखता है। एक साथ चाय पीने के बाद लोगो में भी एक लगाव सा हो जाता है।  

चाय क्या है?()

चाय के पौधें का वैज्ञानिक नाम कैमेलिया साइनेंसिस ( ) हैं। 
चाय एक सुगंधित पेय है जो चाय के पौधों से हरे या सूखे पत्तो  को पानी में उबाल कर तैयार किया जाता है।सामान्यतः इसका रंग लाल या भुरा होता है।
हम इस तरह के चाय को भारतीय चाय कह सकते है। जो आम तौर से भारतीय लोगो द्वारा बहुत पसंद किया जाता है।
स्वाद को और लुभावन बनाने के लिए इसमें हम अदरक या इलायची पाउडर एवम् चीनी को मिला देते है। 
बहुत से लोगो द्वारा इस पेय में दूध भी मिला कर तैयार किया जाता है।
 

चाय का इतिहास (History of Tea)

चाय को पीने का आरंभ पूर्वी एशिया से हुई थी। आज दुनियाँ में अलग अलग तरह के चाय का उत्पादन हो रहा है।
माना जाता है कि चाय का प्रचलन चीन से हुआ था। शुरुवाती दिनों में चाय का उपयोग सिर्फ औषधि के रूप में होता था। जबकि अब हम चाय को एक पेय के रूप में प्रतिदिन लेते हैं।
विकिपीडिया के में “द स्टोरी ऑफ़ टी”(The Story of Tea: A Cultural History and Drinking Guide) के अनुसार, शांग राजवंश (1500 ईसा पूर्व- 1046 ईसा पूर्व) के दौरान युन्नान नाम के राज्य में औषधीय पेय के रूप में चाय पीने की प्रचलन शुरू हुआ । युन्नान प्रांत को “चाय के जन्म स्थान” के रूप में मानी गई है। 
चाय का इतिहास के बारे में बहुत सी कहानिया है। भारत में भी चाय के प्रचलन को भी काफी पुराना माना जाता है लेकिन इसका साक्ष्य नहीं है। कहा जाता है की भारत में चाय को सोमा के नाम से जाना जाता था। 
भारत में चाय की  पैदावार और बिक्री ईस्ट इंडिया कंपनी के आने के बाद ही शुरू हुई। आज भारत दुनियाभर में सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन करता है। इसमें से 70 फीसदी की खपत देश में ही हो जाती है।
असल में अंग्रेजों को चीन के द्वारा किये जा रहे चाय का एकाधिकार व्यापर को रोकने के लिए भारत में चाय की उपज के लिए प्रयास किया। 
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चाय का उत्पादक एवम् निर्यातक देश है। पहले स्थान पर चीन का नाम आता है।
असम राज्य में चाय राजकीय पेय पदार्थ हैं। 

चाय के सेवन से फायदे 

चाय पीने से उसमें मौजूद कैफ़ीन और टैनिन हमारे  शरीर को प्रभावित करते है।सीमित मात्रा में चाय का सेवन फायदेमंद भी होता है। आइए हम चाय से होने वाले कुछ फायदों के बारे में बताते है।

1 -शरीर में फुर्ती

     कई बार हम रोज रोज के कार्यों में थकान का महसूस करते है और आम तौर पर हम भारतीयों के लिए चाय पीना आम बात होता है। चाय में मौजूद कैफ़ीन और टैनिन स्टिमुलेटर की तरह काम करते है ,जिसके वजह से एलहमे फुर्ती का एहसास होता है।

2 -दिमाग को ज्यादा अलर्ट

चाय में एक अमीनो एसिड पाया जाता हैं जिसका नाम एल थियेनाइन है।यह हमारे दिमाग को अलर्ट रखता है।

3 -एंटी-बैक्टीरियल क्षमता

चाय में एंटीजन पाया जाता है जो हमारे शरीर को बैक्टीरिया से लडने में भी सहायक होता है।

4 -एंटी-ऑक्सिडेंट

चाय में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते है जो शरीर को कई बीमारियों से लडने के लिए प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते है।

5 -कैंसर से बचाव में चाय के फायदे

    चाय का उपयोग औषधि के रूप में होता है।कई बीमारियों जैसे कैंसर, एलर्जी, हाई – कोलेस्ट्रॉल ,दिल की बिमारियों में चाय का सेवन फायदेमंद साबित होता हैं। चाय मे पाए जाने वाले एंटी आक्सिडेंट और पालीफिनोल के कारण यह होता है।

चाय के सेवन से सर्दी और जुकाम से भी राहत मिलता है। पाचन तन्त्र में भी मदद करता है। 

6 -डायबिटीज कम करने में चाय के फायदे

    चाय का सेवन डायबिटिज को कम करने में मदद करता है। चाय में चीनी का सेवन नहीं करना चाहिए।

7-सिरदर्द और तनाव में चाय के फायदे

  ऑफिस या अन्य  कार्यों के वज़ह से कई बार हम तनाव या सिरदर्द महसूस करने लगते है। चाय सिरदर्द और तनाव को दूर करने में मदद करता है।

8-वजन करने में सहायक

बहुत लोग चाय का उपयोग वजन कम करने हेतु ज्यादा करते है। चाय शरीर का वजन कम करने में सहायक होता है। किन्तु चाय का सेवन सीमित मात्रा में होना चाहिए।

   

9- हड्डियों को मजबूत करने में 

चाय में फ्लोराइड पाया जाता है।जो दातों और हड्डियों को मजबूत रखता है।

चाय के अधिक सेवन का प्रभाव-

भारत (India) की जलवायु सामान्यतः गरम होती हैं। चाय की अम्लीयता और गर्म मौसम की वजह से हमारे शरीर में पित्त की मात्रा को बढ़ा देता है, जो शरीर के लिए नुकसादायक होती है।

चाय का स्वभाव अम्लीय होता है जिसके कारण यदि इसका सेवन अधिक किया जाए तो अम्लीयता या एसिडिटी जैसे समस्या का सामना करना पड़ सकता हैं।

चाय की फर्मेंटेड पत्तियों से ब्लैक टी तैयार की जाती है। फ्लेवर्ड टी में भी इसका इस्तेमाल होता है और इसमें कैफीन की मात्रा सबसे अधिक होती है।

1 – अम्लता की समस्या (Acidity proplem)

चाय का सेवन ठंडी जगहों पर फायदेमंद साबित होता है।गर्म स्थानों पर चाय का सेवन एसिडिट की समस्या उत्पन्न करने लगता है।

चाय का नेचर एसिडिक होता है और 3से 4 बार यदि प्रत्येक दिन चाय पिया जाए तब चाय नुकसानदेह साबित होने लगती है।

चाय का अधिक सेवन हमारे शरीर में पोषक तत्वों और विटामिन (vitamins) की कमी करने लगता है।

2 -आयरन एब्जॉर्ब करने की शरीर की क्षमता को कम कर देना (Reduce body capacity to absord iron)

चाय अधिक मात्रा मे सेवन करने से शरीर में आयरन(iron) को अवशोषित करने की क्षमता को कम कर देता हैं। जिसके कारण शरीर में आयरन की कमी होने लगती है।

3 -चाय पीने की लत (Addiction of tea)

चाय में कैफिन की मात्रा पेय जाती है। कैफ़ीन के ज्यादा  सेवन से हमें इसका लत लग जाती है।

4 -खुश्की

अधिक चाय शरीर को डिहाइड्रेट (Dehydrate) करने लगता है। जिसकी वजह से हमारी स्किन ड्राई होने लगती है।

5 -पाचन में दिक्कत ,कब्ज की समस्या (Constipation,Problem in digestion)

अधिक चाय पीने से पाचन शक्ति कमजोर होने लगती है।इसका प्रभाव आतों पर भी बहुत बुरा होता है। चाय के अधिक सेवन से बाइल फ्लूइड जो लीवर से स्त्रावित होकर खाना पचाने में सहायक होती है, वह अनियमित हो जाती है।जिससे शरीर में भोजन का पाचन भी सही से नहीं होता।

6 -नींद न आने की समस्या (Sleeping disorder)

चाय पीने से सामान्यतः हमें भूख कम लगने लगता है। ज्यादा सेवन से हमे नींद ना आने की समस्या भी आने लगती है। जो शरीर के जरूरतों को पूरा नहीं होने देता हैं।

7 -गर्भावस्था में चाय का सेवन (Problem in pregnancy due to tea addiction)

चाय में पाए जाने वाला कैफीन बच्चो के विकास पर असर डाल सकता है।डॉक्टरों का भी सलाह होता है कि चाय का सेवन गर्भावस्था में नुकसानदेय साबित हो सकती है।

8 -सीने में जलन पैदा (Chest burns)

चाय पीना सभी को अच्छा लगता हैं किन्तु इसका अधिक सेवन दिल के धड़कनों को प्रभावित करता हैं जिसके वजह से बेचैनी या मिचली जैसे दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता हैं।

9 -बार-बार मूत्र आने की समस्या (Problem in urination )

दिन में कई बार चाय के सेवन dehydration की समस्या हो जाती है।इससे मूत्र भी ज्यादा बार महसूस होती है।

FAQ:

1 -चाय क्या है ?

उत्तर – चाय एक औषधि है। वास्तिक रूप में इसका उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है। 

2 -क्या चाय पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है ?

उत्तर – सही मात्रा में चाय पीना ठीक है। चाय कई प्रकार के बीमारियों को दूर रखता है। 

3 – चाय दिन में कितने बार पीना चाहिए ?

उत्तर – चाय दिन में 1 से 2 कप पी सकते हैं। 

4 -क्या चाय खाने के तुरंत बाद पी सकते है ?

उत्तर – भोजन करने के तुरंत बाद चाय नहीं पीना चाहिए। कम से कम एक से डेढ़ घंटे का गैप होना चाहिए। 

5 -क्या बेड टी लेना ठीक है ?

उत्तर – बेड टी का मतलब है की खाली पेट चाय पीना। खली पेट चाय पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चाय का स्वभाव अम्लीय होता है। खाली पेट पिने से गैस और अल्सर जैसे बीमारियों का खतरा बना रेहता है। 

6 -क्या चाय में कैफीन पाया जाता है ?

उत्तर – जी हाँ। चाय में कैफीन की मात्रा पाई जाती है। चाय में कैफीन की मात्रा कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स से कम होता है। 

आपको चाय के बारे में जानके कैसा लगा। अपना राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे।  अगर आपको ये आर्टिकल बढ़िया लगे तो इसे सोशल मीडिया के द्वारा अन्य लोगो तक शेयर कर हमारे मदद करे। 

धन्यवाद् 

Founder & Lead Writer at A New Thinking Era
Reena Singh

Reena Singh is the founder of A New Thinking Era — a motivational writer who shares self-help insights, success habits, and positive stories to inspire everyday growth.

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By Reena Singh

I’m Reena Singh, the writer behind A New Thinking Era, where I write about motivation, mindset, self-help, everyday life clarity, and financial awareness through real-life reflection rather than surface-level inspiration. I started writing during periods of self-doubt, emotional fatigue, and uncertainty—when consistent effort didn’t immediately turn into results. During those phases, I learned how discipline, habits, and emotional resilience quietly shape progress, especially when motivation fades and clarity feels distant. I believe words can spark change when they come from honesty and experience. Through A New Thinking Era, I share motivational quotes, inspiring stories, life-help articles, and mindset insights to help people rediscover purpose, build inner strength, and stay grounded in hope—no matter what life brings. Along with motivation and mindset, I also write about financial awareness and money mindset based on my personal understanding and everyday experience. I focus on helping readers think more clearly about money, understand basic financial concepts, avoid common mistakes, and build disciplined financial habits—without offering professional or technical advice. This blog is more than a place to publish content. I see it as a space for deeper thinking, calmer reflection, and practical growth. Every post is written with the belief that a single thought, read at the right moment, can shift perspective, reshape a day, or even change direction in life. When I’m not writing, I spend time reading, reflecting, and exploring new ways to turn simple wisdom into meaningful action—both for myself and for the readers who find their way here.

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