Transgender Gauri Sawant and his amazing journey of life

गौरी सावंत:एक अनोखी मां (An Incredible Mother) “खुदी को कर बुलंद इतना की हर तक़दीर से पहले  खुदा बन्दे से खुद पूछे की तेरी राजा की है। “   —आलम इक़बाल  समाज का आईना (Mirror of society): आलम इक़बाल साहब  ने सही कहा है कि अगर तुम कुछ करने का ठान (firm decision)लो तो हर मंजिल आसान हो जाती है।  सुनने में तो “आसान ” शब्द  बहुत अच्छा लगता है ,लेकिन इसके पाने के लिए एक  इंसान अपनी पूरी जिंदगी झोक देता है ।  जी हां आज हम ऐसे ही इंसान कि बात करेंगे जो हमारे समाज के द्वारा यानी हमारे द्वारा बहिष्कृत हो जाता है और हम उनके पास जाने से भी कतराते है।उनका जीवन सिर्फ घूम घूम के खाना ,पीना में ही रह जाता है। वे समाज से अलग रहते है।  क्या  बीतता  है एक मा बाप पे जब उनका बच्चा कुछ घंटो के लिए बिना बताए गायब हों जाता है।पूरा परिवार उठ खड़ा होता …

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MERI JINDAGI KE DO PEHLU : PART – 1 ( मेरी जिंदगी के दो पहलू )

                                         ” एक दिन ख़ुद के लिए जी के देखो  ना ,एक दिन खुद पर लुटा के देखो ना“                           आज मै आपसे कहूंगा की आप अपने यादो में थोड़ा पीछे जाइये, थोड़ा याद करे उन पालो को जब हम बिना किसी फ़िक्र के अपने जिंदगी के हर उन  पलो को भरपूर जिया करते थे।  जबकि हमें  उस उम्र में जिंदगी  का कोई भी तजुरबा भी न था।                           हम सभी को यही लगता है की हमने अपनी असली जिंदगी बचपन में ही जिया है। लेकिन आइये  ईश बात पे हम  विचार करके देखते  है। ऐसी क़या बाते  थी जिनकी वजह से हम वो बेवाक जिंदगी जिया करते थे और  ज्यो ज्यो हमारी   समझ में बढोत्तरी  होना  शुरू  हुआ …

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Childhood Memories : Part -4 ( बचपन की यादें :भाग -4 )

” ख़ामोशी “ क्या महत्वकांछाएं परिस्थितियों से भी बढ़ कर हैं ? (Silence: Are the wishes are more important than the circumstances ?)                        ‘‘ कई बार हम बिना कठिनाइयों को समझे ही उसका हल लेके तैयार रहते हैं ,कभी कभी ऐसे व्यक्तियों के बारे में  मै  सोच के एक अजीब से उलझन में पड़ जाता हूँ ।                        प्रिय पाठको ,बचपन की याद भाग – 4 में ,मैं आपसे एक  ऐसे याद को शेयर करना चाहता हूं जो मीठी तो नहीं है किन्तु आज के अभिभावको के लिए बहुत ही अच्छा सबक  है। ऐसा कई बार होता है कि हम सोचते कुछ और हैं और उसका परिणाम कुछ और ही आता है और जब परिणाम हमारे  सामने होता है   तब तक समय हमारे हाथों से निकल चुका होता है।             …

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POETRY : A HOPEFUL FATHER

आशान्वित पिता A Hopeful Father  ” ऐसा कहा गया  है की जन्मदाता ही हमारे पहले गुरु हैं। एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे छोटी सी खुशी के लिए अपनी सारी खुशियो का बलिदान दे देता   हैं , परिवार के ऊपर परेशानियों की छाया आने से पहले ही वह ढल बन के खड़ा हो जाता हैं। जी हा , मै उसी मजबूत सहारे की तरफ इशारा कर रहा हूँ। वो एक पिता ही हो सकता हैं। “ आंख खुली तो मैंने पाया, मां का साथ पिता की छाया। मां की ममता चीज़ अनोखी, याद किया जब भी घबराया।। मां की गोद में खेला करता, चलना मुझें  पिता ने सिखाया। बीत गए दिन बड़े हो गए, बाप बराबर बेटा आया।। बाप ने सोचा खुद समझेगा, बेटा करता था मनमानी। माफ़ कर देता था वो अक्सर, समझ के उसकी नादानी।। नादानी में अनजाने में, भूल बड़ी कर बैठा था। मां ने जितना हो सकता,हर गलती को समेटा था।। …

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TIME : समय

                                  TIME  ⏳⏳⏳                              “समय नि: शुल्क है, लेकिन यह अनमोल है।  आप इसे अपना नहीं सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं।  आप इसे रख नहीं सकते, लेकिन आप इसे खर्च कर सकते हैं।  एक बार जब आप इसे खो देते हैं तो आप इसे कभी वापस नहीं पा सकते।”    🕯️🕯️🕯️                        “रिश्ता मोमबत्ती और उसके लौ में होता है ,हमारा और समय का भी वही रिश्ता है।”                                                 समय का पहिया चलता जाता, किसी को यह क्यों समझ न आता। समय ही सबसे है …

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POVERTY : गरीबी

                                                                            गरीबी                                 POVERTY            “यह कविता गरीबी के विभिन्न आयामों को दर्शा्ती  र्हैं। “   मनु के जन्म से आज दिवस तक, यह है सबसे विकट विकार। हर शहर हर गांव में दिखती, हर ओर गरीबी अपरम्पार।। यदि कोई जन्म से ठाठ में रहता, वृद्धावस्था में बदलाव। सब कर्मो का फल है प्यारे, बदल गए जो मन के भाव।। बड़े-बड़े महलों में रहकर, वे सुख-चैन को तरसें। कुटिया में भी भोज उत्सव, जब मां अपने हाथ से परसें।। चाहे जितना हो सम्पन्न, गरीबी यह सब की है आती। तीन पहर जो भोजन करता, कभी भूखे …

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