बचपन की यादें भाग -2 (Childhood Memories :Part -2)

बचपन की यादें  (भाग -2 ) अनुशासन: लक्ष्य के अलावा मुझे कुछ भी नहीं दिखता है। (Discipline: I see nothing but goals.)      “हर पल हर वक्त सोचती हूं कि मां-बाप इस कदर कठोर क्यों होते हैं हम गहरी नींद में होते हैं और वे उस वक्त भी नहीं सोते हैं ,आज इतने वर्षों में यह बात समझ में आया “                      प्रिय पाठको मेरे पिछला लेख “बचपन की यादे -भाग १” को इतना सराहना देने के लिए बहुत ही आभारी हूँ। आपके विचारो  को जान के मुझे बहुत खुशी हो रही है ।  आपकी उत्सुकताओं से  मुझे अपने बीते  दिनों के अनुभवो को साझा करने में बहुत प्रोत्साहन मिलरहा हैं। मेरा आपसे निवेदन है की सबके जीवन में छोटी छोटी घटनाएँ होती है जिनके  याद आने भर   से  ही मन में एक ख़ुशी  की लहर सी दौड़ जाती हैं। मैं उन्ही यादो को आपसे साझा करने  के लिए …

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Childhood Memories : Part -1 (बचपन की यादें भाग -1)

    बचपन की यादे। भाग -१     ललक : विद्यालय की प्रार्थना सभा के तालियों की  गूज  ” समेट लो इन नाजुक पलो को , ना जाने ये लम्हें कल हो न हों    हो भी ये लम्हे क्या  मालूम शामिल उन लम्हो में हम हो ना हो  “ “उस दिन शाम को जब मेरी मां ने इस घटना के बारे में पूछा तो डरते हुए सभा की मैंने पूरी बात बताई ,मुझे यह डर था कि कहीं इन  बातो को लेकर मेरी मां मुझसे नाराज ना हो जाय । “                                             मैं    के .ब्राम्ही कक्षा नौ की छात्रा हूं, मेरी यह स्मृति बचपन की  यादों  में से घटी हुई कई घटनाओं में से यह  एक यादगार घटना है।  सन् 2010 की बात है ,मै उस समय उत्तर प्रदेश के अमेठी क्षेत्र में स्थित …

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