POETRY : A HOPEFUL FATHER

आशान्वित पिता A Hopeful Father  ” ऐसा कहा गया  है की जन्मदाता ही हमारे पहले गुरु हैं। एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे छोटी सी खुशी के लिए अपनी सारी खुशियो का बलिदान दे देता   हैं , परिवार के ऊपर परेशानियों की छाया आने से पहले ही वह ढल बन के खड़ा हो जाता हैं। जी हा , मै उसी मजबूत सहारे की तरफ इशारा कर रहा हूँ। वो एक पिता ही हो सकता हैं। “ आंख खुली तो मैंने पाया, मां का साथ पिता की छाया। मां की ममता चीज़ अनोखी, याद किया जब भी घबराया।। मां की गोद में खेला करता, चलना मुझें  पिता ने सिखाया। बीत गए दिन बड़े हो गए, बाप बराबर बेटा आया।। बाप ने सोचा खुद समझेगा, बेटा करता था मनमानी। माफ़ कर देता था वो अक्सर, समझ के उसकी नादानी।। नादानी में अनजाने में, भूल बड़ी कर बैठा था। मां ने जितना हो सकता,हर गलती को समेटा था।। …

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