POETRY : A HOPEFUL FATHER


आशान्वित पिता
A Hopeful Father 

” ऐसा कहा गया  है की जन्मदाता ही हमारे पहले गुरु हैं। एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे छोटी सी खुशी के लिए अपनी सारी खुशियो का बलिदान दे देता   हैं , परिवार के ऊपर परेशानियों की छाया आने से पहले ही वह ढल बन के खड़ा हो जाता हैं। जी हा , मै उसी मजबूत सहारे की तरफ इशारा कर रहा हूँ। वो एक पिता ही हो सकता हैं। “


आंख खुली तो मैंने पाया, मां का साथ पिता की छाया।
मां की ममता चीज़ अनोखी, याद किया जब भी घबराया।।

मां की गोद में खेला करता, चलना मुझें  पिता ने सिखाया।
बीत गए दिन बड़े हो गए, बाप बराबर बेटा आया।।

बाप ने सोचा खुद समझेगा, बेटा करता था मनमानी।
माफ़ कर देता था वो अक्सर, समझ के उसकी नादानी।।

नादानी में अनजाने में, भूल बड़ी कर बैठा था।
मां ने जितना हो सकता,हर गलती को समेटा था।।

हालात बिगड़े, रिश्ते बिगड़े, बिखर गया संसार।
लगा था जैसे खत्म हो गए है जीवन के आसार।।

लेकिन उसने हार न मानी, मानी थी वो गलती।
समझ आ गया जीवन का सच, खलती अब है हर गलती ।।

ठान लिया जो तूने तो, ये दुनिया पीछे आएगी।
सफल देखकर तेरा चेहरा , आंखे पिता की नम हो जाएंगी।।

लगा गले फिर गर्व हुआ, एक अनोखा पिता का साया
लाखों में तू एक ही था, जिसको मौका दिया खुदा ने ।।

हम हजार गलतिया कर दे , पिता उसे माफ़ कर देता हैं। हमें पिता के साथ हमेशा  उस मोड़ पे खड़े रहना चाहिए , जब कभी भी उनको  हमारी जरुरत महसूस हो। यदि हम इतना करते है, तो भी  हम पितृ ऋण से मुक्त नहीं हो सकते ।  

धन्यवाद 

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रचनाकार 
अविरल शुक्ला 
रीतेश सिंह 


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Reena Singh
Founder & Lead Writer at A New Thinking Era
Reena Singh

Reena Singh is the founder of A New Thinking Era — a motivational writer who shares self-help insights, success habits, and positive stories to inspire everyday growth.

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