baccho ki poem
POETRY : A HOPEFUL FATHER
आशान्वित पिता A Hopeful Father ” ऐसा कहा गया है की जन्मदाता ही हमारे पहले गुरु हैं। एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे छोटी सी खुशी के लिए अपनी सारी खुशियो का बलिदान दे देता हैं , परिवार के ऊपर परेशानियों की छाया आने से पहले ही वह ढल बन के खड़ा हो जाता हैं। जी हा , मै उसी मजबूत सहारे की तरफ इशारा कर रहा हूँ। वो एक पिता ही हो सकता हैं। “ आंख खुली तो मैंने पाया, मां का साथ पिता की छाया। मां की ममता चीज़ अनोखी, याद किया जब भी घबराया।। मां की गोद में खेला करता, चलना मुझें पिता ने सिखाया। बीत गए दिन बड़े हो गए, बाप बराबर बेटा आया।। बाप ने सोचा खुद समझेगा, बेटा करता था मनमानी। माफ़ कर देता था वो अक्सर, समझ के उसकी नादानी।। नादानी में अनजाने में, भूल बड़ी कर बैठा था। मां ने जितना हो सकता,हर गलती को समेटा था।। …
TIME : समय
TIME ⏳⏳⏳ “समय नि: शुल्क है, लेकिन यह अनमोल है। आप इसे अपना नहीं सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं। आप इसे रख नहीं सकते, लेकिन आप इसे खर्च कर सकते हैं। एक बार जब आप इसे खो देते हैं तो आप इसे कभी वापस नहीं पा सकते।” 🕯️🕯️🕯️ “रिश्ता मोमबत्ती और उसके लौ में होता है ,हमारा और समय का भी वही रिश्ता है।” समय का पहिया चलता जाता, किसी को यह क्यों समझ न आता। समय ही सबसे है …
CORONA : कोरोना
कोरोना ( CORONA ) 🍀🍀🍀 हर किसी की आंखों में, एक रोष सा अब दिखता है, जिसे देखो हर ओर, ख़ामोश सा सब दिखता है।। चारो तरफ़ है खौफ़, खुद की ही गलती का नतीज़ा, सब दुबक कर घर में बैठे, चाहे हो विधायक का भतीजा।। शुरुआत हुई तो लगा मज़ाक, चाइना को दी गाली, आज जब देश पे आया संकट, हर सड़क हो गई खाली।। पशु-पक्षी आज़ाद घूम रहे, पिंजरे में इंसान, मंदिर में भी लगा है ताला, क्वारांटाइन पे भगवान।। पांच बजे सब छत पे आ गये, संग थाली और शंख। धन्यवाद हैं देते सारे, चाहे राजा हो या रंक।। मास्क-सैनिटाइजर की, बाज़ार में लगी होड़। वापस गांव को भाग रहे, संपन्न शहरों को छोड़।। शहर, गांव, हर देश में फैला ये कोरोना, ऐ मेरे भारतवासियों अब तो तुम जागोना।। भूल जाओ सब धर्म-जाति, तोड़ दो सारे धागे, मानवता से बढ़कर क्या, मानवता सबसे आगे।। …
POVERTY : गरीबी
गरीबी POVERTY “यह कविता गरीबी के विभिन्न आयामों को दर्शा्ती र्हैं। “ मनु के जन्म से आज दिवस तक, यह है सबसे विकट विकार। हर शहर हर गांव में दिखती, हर ओर गरीबी अपरम्पार।। यदि कोई जन्म से ठाठ में रहता, वृद्धावस्था में बदलाव। सब कर्मो का फल है प्यारे, बदल गए जो मन के भाव।। बड़े-बड़े महलों में रहकर, वे सुख-चैन को तरसें। कुटिया में भी भोज उत्सव, जब मां अपने हाथ से परसें।। चाहे जितना हो सम्पन्न, गरीबी यह सब की है आती। तीन पहर जो भोजन करता, कभी भूखे …














